णमो अरिहंताणं          णमो सिद्धाणं        णमो अयारियाणं        णंमो उव्झ्याणं         णंमो लोएसव्वसाहूणं

चरित्र चक्रवर्ती आचार्य 108 श्री ज्ञानसागर जी सराकों के मसीहा बुद्धि जीवी वर्ग के प्रणेता युवाओं के पथ प्रदर्शक वात्सल्य वरिधी गुरुदेव

अखिल भारतीय जैन प्रतिभा सम्मान समारोह २७ नवंबर २०१५ सोनागिर आचार्य ज्ञानसागरजी के सानिध्य मे आयोजित किया गया हैं |

३१ दिसंबर रात १२ बजे महाराजी के सानिध्य मैं नया वर्ष मनाया जायेगा |

१ जनवरी २०१६ नन्दीश्वरदीप का महामस्तकाभिषेक एवं सभी मूर्तियों का अभिषेक किया जायेगा |

२९ जनवरी २०१६ से ६ फरबरी २०१६ को अतिशय तीर्थ नवागढ़ मे आचार्य ज्ञानसागरजी के सानिध्य में पंच कल्याणक एवं गजरथ महोत्सव का आयोजन किया गया है |

आचार्य ज्ञानसागरजी के दर्शन कर एवं अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्म लाभ लें!

आप सभी को आने वाले वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !!!!


राष्ट्रसंत परम पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञान सागर जी महाराज का व्यक्तित्व

ज्ञान की सम्पदा से सम्रद्ध राष्ट्रसंत परम पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञान सागर जी महाराज का व्यक्तित्व एक ऐसे क्रांतिकारी साधक की अनवरत साधन यात्रा का वह अनेकान्तिक दस्तावेज है जिसने समय के नाट्य गृह में अपने सप्तभंगी प्रज्ञान के अनेकों रंग बिखेरे हैं | राष्ट्रसंत परम पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञान सागर जी वर्तमान युग के एक ऐसे युवा द्रष्टा क्रांतिकारी विचारक जीवन सर्जक और आचार्य निष्ठ दिगम्बर संत हैं जिनके जनकल्यानी विचार जीवन के अनन्त गहराइयों अनुभूतियों एवं साधना की अनन्त ऊचाईयो से उदभूत हो मानवीय चिंतन के सहज परिष्कार में सन्नद्व है | पूज्य गुरुदेव के उपदेश हमेशा जीवन समस्याओ की गहनतम गुप्थियों के मर्म का संस्पर्श करते है | जीवन को उसकी समग्रता में जानने और समझने की कला से परिचित कराते हैं | उनके साधनामायी तेजस्वी जीवन को शब्दों की परिधि में बंधना संभव नहीं है | परम पूज्य आचार्य श्री के सन्देश युगों युगों तक सम्पूर्ण मानवता का मार्गदर्शन करें , हमें अन्धकार से दूर प्रकाश के बीच जाने का मार्ग बताते रहे हमारी जड़ता को इति कर हमें गतिशील बनाये सभ्य शालीन एवं सुसंस्कृत बनाते रहें यही हमारे मंगल भाव हैं हमारे चित्त की अभिव्यक्ति है और है हमारे प्राथना भी !
लेना हो तो - आशीर्वाद लो |
तोलना चाहते हो तो - बात को तोलो |
खाना चाहते हो तो - क्रोध को खाओ |
देखना चाहते हो तो - सदगुण देखो|
मारना चाहते हो तो - बुरी इच्छाओं को मारो |
बोलना चाहते हो तो - सत्य मीठे वचन बोलो |
करना चाहते हो तो - दीन दुखियों की सहायता करो |